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महात्मा गांधी शती स्मारक महाविद्यालय, गरुआ मकसूदपुर, गाज़ीपुर में 16 अक्टूबर 2026 को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से “Be the First Support, Not the First Judge: Learning the Basics of Psychological First Aid” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भावनात्मक समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित करना, तथा संकट की स्थिति में जरूरतमंद व्यक्तियों को प्राथमिक मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. गरिमा गुप्ता, सहायक आचार्य, मनोविज्ञान विभाग आर्य महिला पी. जी. कॉलेज उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व तथा Psychological First Aid (PFA) की अवधारणा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक तनाव या भावनात्मक संकट से गुजर रहे व्यक्ति की सहायता करने के लिए उसकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनना, उसकी भावनाओं को समझना, और बिना किसी पूर्वाग्रह के उसे सहयोग प्रदान करना है। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को समझाया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के समय किसी व्यक्ति की आलोचना करने या उसे दोषी ठहराने के बजाय उसे भावनात्मक सहयोग और सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। ज्ञान श्रोत के रूप में बोलते हुए वक्ता ने संवेदनशील संवाद, सहानुभूति, धैर्य तथा जरूरतमंद व्यक्ति को उचित पेशेवर सहायता उपलब्ध कराने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। अंत में डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक सामाजिक व्यक्ति के रूप में ये हम सभी की जिम्मेदारी है, कि मनुष्य के कल्याण के लिए
कार्यक्रम का आयोजन मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक श्वेता सिंह के संयोजन में किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनने तथा अपने आसपास के लोगों की भावनात्मक समस्याओं को समझने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल व्यक्तिगत आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। किसी संकटग्रस्त व्यक्ति को बिना किसी निर्णय या आलोचना के सुनना और उचित सहायता प्रदान करना उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कार्यक्रम का समापन मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा एक संवेदनशील, सहयोगपूर्ण और जागरूक समाज के निर्माण का संकल्प लेने के संदेश के साथ हुआ।
कार्यशाला का संदेश:
“न्याय करने से पहले समझें, आलोचना करने से पहले सुनें और सलाह देने से पहले सहयोग दें।”
कार्यक्रम: एक दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला